रैम्प योजना के तहत एनएसई कार्यशाला संपन्न

जबलपुर
जबलपुर संभाग के लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के प्रदर्शन में सुधार लाने के उद्देश्य से रेजिंग एंड एक्सलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैम्प) योजना के तहत आज शुक्रवार को होटल शॉन अलीजे में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संभाग के जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्रों, विभिन्न उद्योग संघों एवं उद्यमियों ने भागीदारी की।

कार्यशाला का शुभारम्भ उद्यमियों को रैम्प योजना की विस्तृत जानकारी प्रदान कर किया गया। कार्यशाला में उद्यमियों को आईपीओ के माध्यम से फंड प्राप्त करने और रैंप योजना के अंतर्गत एनएसई एसएमई बोर्ड पर पंजीकरण करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इसके साथ ही ज़ीरो डिफेक्ट ज़ीरो इफेक्ट (जेड) योजना, एमएसएमई कॉम्पिटीटिव लीन स्कीम (एमसीएलएस) एवं बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

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कार्यशाला में मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम एवं रैम्प योजना के स्टेट नोडल अधिकारी अनिल थागले ने एनएसई के माध्यम से उद्योगों को वित्तीय संसाधन जुटाने के तरीकों पर प्रकाश डालते हुए योजना के उद्देश्य, मध्य प्रदेश सरकार की भूमिका और स्थानीय उद्योगों के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट सुश्री पार्वती मूर्ति ने उद्यमियों को स्टॉक लिस्टिंग प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि लगभग 15 उद्योगों ने एनएसई लिस्टिंग के लिए अपनी रुचि व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एसएमई इकोसिस्टम को मजबूत करने से न केवल यह लार्ज-स्केल इंडस्ट्रीज को आकर्षित करता है, बल्कि उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी भी बनाता है। एनएसई में लिस्टेड उद्यमों को वित्त के नए तरीकों के साथ साथ राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान भी प्राप्त होती है।

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संयुक्त संचालक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग विनीत रजक ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि एमएसएमई इकाइयों को पूंजी के लिए गैर पारंपरिक वित्तीय व्यवस्थाओं को अपनाना चाहिए। यह उद्योगों के स्थायित्व के लिए जरूरी है। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के अधिकारी बी प्रभाकर ने उत्पादकता बढ़ाने के विषय पर चर्चा की। उन्होंने उद्योगपतियों को लीन योजना एवं कानबान सिस्टम आदि के बारे में जानकारी दी।

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